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कोई अदृश्य ताक़त ही गांधी को मरने से बचा रही है ? -श्रवण गर्ग   राष्ट्रपिता की छाती को गोलियों से छलनी कर देने और उसके बाद अंबाला सेंट्रल जेल में फाँसी पर लटकाए जाने की अवधि के बीच नाथूराम गोडसे एक वर्ष नौ महीने सोलह दिन इसी यक़ीन के साथ जीवित रहा कि उसने गांधी को अंतिम रूप से देश और दुनिया से समाप्त कर दिया है ।गोडसे परिवार के जो भी सदस्य नाथूराम से इन 655 दिनों के दौरान अंबाला सेंट्रल जेल में मिले होंगे उसे यही यक़ीन दिलाते रहे होंगे कि (तब) तैंतीस करोड़ की जनसंख्या वाले आज़ाद भारत में केवल कुछ अनुयायियों के अलावा गांधी का कोई और नामलेवा नहीं बचा है।गांधी के शरीर के साथ उसका विचार भी नेस्तनाबूत किया जा चुका है।अपनी इस उपलब्धि को लेकर गोडसे को निश्चित ही गर्व की अनुभूति होती होगी।  पंद्रह नवम्बर 1949 के दिन अंबाला सेंट्रल जेल में फाँसीघर में पहुँचकर गोडसे और गांधी वध के सह-अभियुक्त नाना आपटे ने ‘अखंड भारत अमर रहे ‘ तथा ‘वंदे मातरम्’ का घोष किया और फिर ( संघ की ) इस प्रार्थना को उच्चारित किया :’नमस्ते सदा वत्सले मात्रभूमे, त्वया हिन्दुभूमे सुखम वर्धितोअहम्।महामंगले पुण्यभ...
  डर   तो   अमित   शाह   से   लगना   चाहिए  !  मोदी   से   नहीं  ! - श्रवण   गर्ग   दस   दिसंबर   के   ऐतिहासिक   दिन  ‘ वोट   चोरी ’  या  SIR  पर   हुई   बहस   का   जवाब   अगर   प्रधानमंत्री   मोदी   देते   तो   क्या   वे   भी   उनके   भाषण   के बीच   विपक्ष   के   नेता   राहुल   गांधी   के   हस्तक्षेप   पर   वैसे   ही  नाराज़गी जाहिर करते  जैसे   गृह   मंत्री   अमित   शाह   को   होते   हुए   देश - दुनिया  ने  देखा   और   तीखी   प्रतिक्रिया   भी   व्यक्त   की  ?  अमित   शाह   अगर   राहुल   गांधी   पर ,  चाहे   कुछ   क्षणों   के   लिए   ही   सही ,  इतने   आक्रामक अंदाज़  में ...