‘ गोदी मीडिया ’ के ‘ एप्सटीन ’ दस्तावेज कब बाहर आएँगे ? - श्रवण गर्ग मेरे जैसे उन तमाम लोगों को जिन्होंने किसी ज़माने में ‘ दूरदर्शन ’ के शानदार उदघोषकों के साथ टीवी के पर्दों पर अपनी सुबह और शामें बिताई हैं उन्हें इस वक्त जो चल रहा है उसे देखते हुए सौम्य व्यक्तित्व की धनी समाचार - वाचिका सरला माहेश्वरी के हाल में हुए निधन से उत्पन्न हुई रिक्तता की पीड़ा को महसूस करने में ज़्यादा कठिनाई नहीं महसूस करना चाहिए ! पूँजीपतियों की गोद में खेल रहे चैनलों...
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कोई अदृश्य ताक़त ही गांधी को मरने से बचा रही है ? -श्रवण गर्ग राष्ट्रपिता की छाती को गोलियों से छलनी कर देने और उसके बाद अंबाला सेंट्रल जेल में फाँसी पर लटकाए जाने की अवधि के बीच नाथूराम गोडसे एक वर्ष नौ महीने सोलह दिन इसी यक़ीन के साथ जीवित रहा कि उसने गांधी को अंतिम रूप से देश और दुनिया से समाप्त कर दिया है ।गोडसे परिवार के जो भी सदस्य नाथूराम से इन 655 दिनों के दौरान अंबाला सेंट्रल जेल में मिले होंगे उसे यही यक़ीन दिलाते रहे होंगे कि (तब) तैंतीस करोड़ की जनसंख्या वाले आज़ाद भारत में केवल कुछ अनुयायियों के अलावा गांधी का कोई और नामलेवा नहीं बचा है।गांधी के शरीर के साथ उसका विचार भी नेस्तनाबूत किया जा चुका है।अपनी इस उपलब्धि को लेकर गोडसे को निश्चित ही गर्व की अनुभूति होती होगी। पंद्रह नवम्बर 1949 के दिन अंबाला सेंट्रल जेल में फाँसीघर में पहुँचकर गोडसे और गांधी वध के सह-अभियुक्त नाना आपटे ने ‘अखंड भारत अमर रहे ‘ तथा ‘वंदे मातरम्’ का घोष किया और फिर ( संघ की ) इस प्रार्थना को उच्चारित किया :’नमस्ते सदा वत्सले मात्रभूमे, त्वया हिन्दुभूमे सुखम वर्धितोअहम्।महामंगले पुण्यभ...