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  ‘ नागरिकों ’  को  ‘ शरणार्थियों ’  में   बदलने   का   षड्यंत्र   तो   नहीं   है  ?  - श्रवण   गर्ग   बात   कोलकाता   के   प्रसिद्ध   सत्ता - विरोधी   अंग्रेज़ी   दैनिक  ‘ द   टेलीग्राफ ’  के   पूर्व   संपादक - पत्रकार   आर   राजगोपाल   की   पीड़ा   से   शुरू   करते हैं।राजगोपाल   की   पीड़ा   हालाँकि   काफ़ी   चर्चा   में   आ   चुकी   है   फिर   भी   मूल   विषय   को   आगे   बढ़ाने   के   लिए   उसका   उल्लेख   ज़रूरी   है।   पश्चिम   बंगाल   में   हुए   हाल   के   विधानसभा   चुनावों   में  SIR  के   तहत   जिन   लाखों   लोगों   के   नाम   मतदाता   सूचियों   से   बाहर   कर   दिये   गए   थे उनमें...