नेहरू के पुण्य स्मरण के बहाने ‘भारतीयता’ की खोज ! -श्रवण गर्ग शायद यही सही समय है पूछे जाने का कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आज़ादी के पहले अहमदनगर क़िले के कारावास के दौरान अपनी महान रचना ‘डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया’ के ज़रिए जिस प्राचीन ‘भारत’ और ‘भारतीयता’ की खोज की थी वह क्या अब अप्रासंगिक और ग़ैर-ज़रूरी हो गई है ? सत्तारूढ़ बीजेपी और संघ के सपनों के ‘नए भारत’ के निर्माण के लिए क्या किसी नई भारतीयता की तलाश या फिर उसका आविष्कार आवश्यक हो गया है ? कोई तो कारण अवश्य ही रहा होगा कि नेहरू को आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाता है ! सवाल खड़े किए जा रहे हैं कि जिस ‘भारतीयता’ से नेहरू ने देश का साक्षात्कार कराया था वह तात्कालिक परिस्थितियों की देन थी। वे स्थितियाँ अब प्रासंगिक नहीं रहीं हैं। उक्त ‘धर्मसंकट’ एक ऐसे समय उपस्थित हुआ है जब ‘भारतीयता’ की अलग-अलग व्याख्याओं पर बुद्धिजीवियों और धर्मगुरुओं के बीच चल रहे संघर्षों के बीच नागरिक अपने प्राणों की रक्षा के लिए रास्ते तलाश रहे हैं ! असली ‘भारतीयता’ क्या है उसे समझाने की हाल के सालों की पहली अस...
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Showing posts from May, 2026
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चापलूसी और झूलेबाज़ी के ज़रिए विदेश नीति के असफल प्रयोग ! -श्रवण गर्ग डॉनल्ड ट्रम्प की चीन यात्रा की विफलता के कारणों को लेकर अमेरिकी मीडिया में जो विश्लेषण प्रकाशित हो रहे हैं हमारे लिए इस नज़रिए से चौंकानेवाले हो सकते हैं कि उनके निष्कर्षों को विदेश नीति के मोर्चों पर प्रधानमंत्री मोदी की असफलताओं के साथ भी नत्थी किया जा सकता है ! भारत का मेनस्ट्रीम मीडिया (कुछ अपवादों को छोड़कर) चूँकि पूरी तरह से कंप्रोमाइज्ड या आतंकित है अपनी चर्चाओं में मोदी की विदेश यात्राओं की विफलताओं के असली कारणों की निष्पक्ष तरीक़ों से चीर-फाड़ नहीं करता ! मोदी चूँकि मीडिया का सामना नहीं करते (ताज़ा उदाहरण नॉर्वे का है) ट्रम्प की तरह उनसे सवाल नहीं किए जा सकते कि सत्ता में पिछले बारह सालों के दौरान सौ के क़रीब पहुँच रही विदेश यात्राओं से ‘इण्डियन डायस्पोरा’ में विपक्ष की आलोचना पर तालियों की गड़गड़ाहट के अतिरिक्त वे और क्या वापस लेकर लौटे हैं ? ट्रम्प ने अपनी दो-दिनी यात्रा में चीनी राष्ट्रपति शी के साथ नौ घंटों तक उन तमाम मुद्दों पर बातचीत की जो दुनिया के दो शक्तिशाली राष्ट्रों के बीच तनाव ...
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मोदी ने नीदरलैंड से क्यों डराया कि संकट गहरा है ? -श्रवण गर्ग राष्ट्रपति ट्रम्प की दो-दिनी चीन यात्रा विफल हो गई है और उसके संकेत प्रकट भी होने लगे हैं। पहला बड़ा संकेत यह है कि अमेरिका-इज़राइल मिलकर ईरान के ख़िलाफ़ कोई निर्णायक करवाई कर सकते हैं और इसी आशंका के चलते रूस के राष्ट्रपति पुतिन मंगलवार को बीजिंग पहुँच रहे हैं।ट्रम्प की यात्रा के विफल होने का सबसे बड़ा करण ताइवान पर चीन के क़ब्ज़े को लेकर दोनों देशों के बीच किसी सहमति का नहीं बनना बताया जाता है। ताइवान को लेकर राष्ट्रपति शी से हुई बातचीत पर ट्रम्प कुछ भी जवाब नहीं दे रहे हैं। दूसरा संकेत यह है कि अमेरिकी बाज़ार तेज़ी से गिरने लगे हैं, कच्चे तेल के दाम बढ़ गए हैं और फर्टिलाइजर का बड़ा संकट दुनिया के कृषि उत्पादन पर मंडराने लगा है। इससे पहले कि बढ़ती महंगाई के चलते अमेरिकी जनता का आक्रोश सड़कों पर व्यक्त हो, हॉर्मूज़ के समुद्री मार्ग को खुलवाना ट्रम्प के लिये ज़रूरी हो गया है।अमेरिका में नवंबर में महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनाव हैं और ट्रम्प के सामने बहुमत खोने का ख़तरा मंडरा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की यूएई या...