अब तो बच्चों को भी पता चल गया कि सत्ता कितनी क्रूर है !


-श्रवण गर्ग 


सोशल मीडिया पर इस समय एक वीडियो खूब वायरल है। पंद्रह साल की एक बच्ची का ! बच्ची पर यह आरोप है कि बीस जुलाई के दिन जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के  दौरान उसने प्रधानमंत्री और उनकी माँ को लेकर अपशब्द कहे या ‘भद्दी-भद्दी गालियाँ दीं थी।’ मोदीजी अपने पाँचवे इंस्टाग्राम वीडियो संदेश में सभी ‘गुमराह बच्चों’ को माफ़ कर चुके हैं फिर भी इस बच्ची के ख़िलाफ़ नोएडा में एक एफ़आइआर क़ायम है।पुलिस उसकी तलाश कर रही है।कहा जा रहा है कि प्रदर्शन के दिन से ही बच्ची अपने फ़रीदाबाद स्थित घर से ग़ायब है। 


वीडियो में बच्ची गर्दन झुकाए,आँखें नीची किए और हाथ जोड़े खड़ी हुई है। धीमी-धीमी आवाज़ में वह कहती है :’मैंने जो कहा उसके लिये माफ़ी के लायक़ नहीं हूँ। यह मेरी पहली और आख़िरी गलती है। मैं पूरे देश से माफ़ी माँगती हूँ। मैं इतनी शर्मिंदा हूँ कि अपनी नज़रें भी नहीं उठा पा रही हूँ। मैं सबसे माफ़ी माँगती हूँ।मुझे माफ़ कर दीजिए !’


सरकारउसकी पुलिस और ‘ख़ूँख़ार’ भक्तों की जमात बच्ची को माफ़ करने को तैयार नहीं है।अदालतें भी वीडियो का और प्रसारण नहीं रोक पा रही हैं। कथित तौर पर उसकी व्यक्तिगत जानकारी जिसमें उसका फ़ोन नंबर भी शामिल है सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया गया है जिसके बाद से उसे बलात्कार और मौत की धमकियाँ दी जा रही है।


मोदीजी के सारे उपदेशात्मक भाषण और इंस्टाग्राम वीडियो प्रधानमंत्री के पद से उनकी विदाई के साथ ही ग़ायब हो जाएँगे पर इस मासूम बच्ची का वीडियो आगे आने वाले कई दशकों तक उसका पीछा करता रहेगा। बच्ची अगर मौजूदा सदमे से बाहर  पाई तो युवा होकर कॉलेज भी जाएगीभ्रष्ट प्रतियोगी परीक्षाओं का शिकार भी बनेगीकुछ बनेगीघर भी बसाएगी पर उसका यह वीडियो माथे पर एक अशुभ निशान की तरह क़ायम रहेगा। आगे की पीढ़ियों के लिए वर्तमान के क्रूर साम्राज्य की कहानियाँ उजागर करता फिरेगा। 


हक़ीक़त यही है कि बीस जुलाई के ऐतिहासिक प्रदर्शन में जितने भी बच्चों ने भाग लिया था उन सभी के चेहरे facial recognition के ज़रिए हमेशा-हमेशा के लिए पुलिस रिकॉर्ड में  दर्ज हो गए हैं। ये बच्चे अब जहां-जहां भी जाएँगे, जब-जब भी उन्हें पुलिस वेरिफिकेशन की दस्तावेजी ज़रूरत पड़ेगी ये सारे रिकॉर्ड उनके साथ-साथ चलेंगे। 


एक भयभीत हुकूमत बच्चों को बहादुर बनाने के बजाय उन्हें डरा रही है ,कायर बना रही है। हुकूमत शायद नहीं जानती है कि पंद्रह साल की बच्ची का वीडियो जैसे-जैसे देश के स्कूलोंकॉलेजों में पहुँचेगा बच्चों के मन में सत्ता के प्रति क्रोध और नाराज़गी का कितना विस्तार होगा ! सत्ता के ख़ौफ़ के आगे माफ़ी माँगने वाले हरेक बच्चे की पीड़ा भविष्य के आंदोलनों के लिए प्रतिरोध का पोस्टर बन जाएगी।


सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के आतिथ्य में दो अगस्त के लिए प्रस्तावित ‘टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़’ के दीक्षांत समारोहको किसी अप्रत्याशित घटना के भय से आगे की किसी तिथि के लिये स्थगित  कर दिया गया। घटना क्या हो सकती थी ? क्या उसी तरह की कोई जैसी मुख्य न्यायाधीश की लंदन यात्रा के दौरान हुई थी ? 


हुकूमत की रगों में व्याप्त असुरक्षा की पराकाष्ठा है कि उसे सिर्फ़ संसद और विपक्ष ही नहीं बल्कि बच्चों का सामना करने से भी डर लग रहा है ! प्रधानमंत्री रात को ठीक से सो नहीं पा रहे हैं ! हताशा में एक के बाद एक वीडियो जारी कर रहे हैं। बच्चों के साथ इमोशनल ब्लैकमेल किया जा रहा है ! पंद्रह साल की बच्ची का वीडियो क्या इसका प्रमाण नहीं है ? क्या यह हुकूमत की सत्ता से रवानगी की पूर्व-सूचना तो नहीं है ? 



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